في صباح  يوم الأربعاء  06  ماي  2020  صرح  وزير الصحة  في  حكومة  كراكيز  مافيا  الجنرالات   الحاكمة على الجزائريين بما يلي :"ولفت الوزير أن ” التعايش مع الفيروس سيستمر لشهور أخرى”. !!

أولا : مامعنى  التعايش  مع  المرض  المزمن  أو مع عاهة  مستديمة  أو  مع  العدو ؟

في  عدد 03  ماي 2020  من  الموقع  الإعلامي  الجزائري  (   TSA  )  كل  شيء  عن  الجزائر  جاء  فيه ما يلي  حرفيا  "  و حسب تقرير الوزارة  ( يعني وزارة الصحة  الجزائرية ) لنهار اليوم الأحد 03  ماي، فقد إرتفع إجمالي عدد الوفيات في الجزائر إلى 463 ضحية منذ بداية ظهور الوباء فيها قارب عدد المصابين النصف مليون شخص. بعد وصول العدد إلى  4474  مصاب."  ...ومن  الأكيد  أن  في  صيغة  الخبر  خطأ  مطبعي  مقصود   وهو  ما  تفعله  الصحافة  التي  تريد  أن   تمرر خبراً  ما    لكنها  تُحرف  حرفا   بالزيادة  أو   النقصان  أو تغيير  الحرف حتى  يقع  القارئ  في  حيص  بيص  من  أمره  ، لكن  المتمرس  على  مثل  هذه  التصحيفات  يقرأ  الخبر  ويأتي  بمعناه  الصحيح  حسب  السياق  ...  يقول  الموقع الإعلامي (  منذ  ظهور  الوباء  فيها  قارب  عدد  المصابين  النصف مليون  شخص )  والأصح  هو (  463  ضحية منذ  ظهور  الوباء ، فيما  قارب  عدد  المصابين  النصف  مليون  شخص  بعد  وصول  العدد إلى  4474  مصاب "  وهكذا  يستقيم  المعنى  حسب  سياق  الخبر  عموما  ....  وأخيرا  جاء  تأكيد  إصابة  نصف  مليون  جزائري  على  الأقل  لكن  هذه  المرة  عن  طريق  اعتراف  وزير  الصحة  بأن  الدولة  انهزمت  أمام  هذا  الوباء   وقررت  التعايش  معه .. فما معن  التعايش  مع  المصائب  التي  تصيب  الإنسان  ؟  سنتناول  ذلك  من  خلال  أمثلة  قريبة  من  حالتنا  مع  فيروس  كرورنا   الذي  انتشر  في   الجزائر  وكانوا  يكذبون  علينا  بأخبار  (  الوضع  متحكم  فيه  )   إلى  أن  أصبح  الأمر  مفضوحا  للعالم  ...

في صباح  يوم  الأربعاء  06  ماي  يؤكد  وزير  الصحة  في  حكومة  الكراكيز  أن  التعايش مع  الفيروس  سيستمر  لشهور  أخرى ،  وما  معنى  التعايش  مع  المصاب  أو  الحدث  يعني  الهزيمة  وأن  الدولة  وضعت  السلاح  في  مواجهة  العدو  القاتل  واختارت  التعامل  معه  يوما  بيوم  وحسب  ما لديها  من  إمكانيات  في ذلك  اليوم و تترك  الباقي  للموت  المحقق أي  بلغة  موليير (vivre au jour le jour  ) ..

إن  هذا  التصريح  يعني  أن  الوباء  قد  انتشر  كما  جاء  في  الموقع  الإخباري ( كل  شيء  عن  الجزائر )  يوم  03 ماي  2020  والذي  نقلته  عن  تقارير  وردت  من  وزارة  الصحة  ،  إذن  سيكون  على  الشعب  الجزائري  أن  يعتمد على  نفسه  في  تجنب  الإصابة  لأن  الدولة   تخلت  عنه   واعترفت  بأنها  انهزمت  بقولها  : " أن  التعايش مع الفيروس سيستمر لشهور أخرى”.  أما  عدد  الشهور فيعلم  الله   بها  ،  ثم  إن  كلمة   " التعايش " مع  مرض  ما  أو  إصابة   الجسم  بعاهة  لا يقولها  الطبيب  لمريضه  إلا  عندما  يصل  إلى  نتيجة  واحدة  وهي  استحالة  العلاج ،  فيخبر  عائلة  المريض  بأن  المريض  عليه  أن  يتعايش  مع  مرضه  مثل  شخص  ولد  بشيء  زائد  في  جسمه  عليه  أن  يعيش  معه  طيلة  حياته  مثلا  ( إصبع  صغير  زائد  أو  عظم  ناتئ  في  الكتف  أو  القدم  وما  إلى  ذلك  )  وما على  هذا  الشخص  إلا  أن  يتعايش   مع  الزيادة  التي  ليست  طبيعية  كما  بقية  مخلوقات  الله ،  وهذا  مثال  لا  يسبب  ضررا  لصاحبه  يمكن  أن   يتعايش  معه  ،  ومن  الأمراض  التي  يمكن  أن  يتعايش  معها  الإنسان  مرض  السكري  والربو  وبعض  التشوهات   الخِلْقِيَة  في  القلب  وغيرها  كثير  .... 

لكن  ما  يهمنا  نحن  في  حالتنا  وصراعنا   في  الجزائر  مع  كورونا   فهي  تشبه   حالة  الحرب  التي  يضع  فيها  الجيش  السلاح  ويترك  الشعب  لمواجهة  واقعه  مع  عدوه   وهذا  مثال  واضح  عن  ذلك ...

ثانيا :  التعامل  مع  المصابين  في  الحروب :

هل  اختار  تبون  حاشاكم  أن  يعامل  المصابين  بكورونا   في  الجزائر  معاملة  (  حالة  الحرب  ) ؟

ما  معنى  معاملة  المصابين  معاملة  ( حالة  الحرب )  ؟  يعلم  الجميع  أنه   في  كل  حرب   تقليدية  مثل  الحرب  العالمية الأولى  والثانية  وكذلك  بعض  المناوشات  التي  تقع  بين  جيشين  في  هذا   العصر  ،  تكون  جبهة  القتال  هي  الواجهة  الأولى  لِـتَصَادُمِ  الجيشين  وغالبا  ما  تكون  في  آخر  هذه  الجبهة   مستشفيات  عسكرية   ميدانية  تستقبل  المصابين  في  هذه  الحرب ،  والأطباء  والممرضون  في  هذا  المستشفيات  الميدانية  يستقبلون  المصابين  ومن  خلال  عدد  المصابين  وأنواع   الإصابات  تظهر  للأطباء  والممرضين   وضعية  جيشهم  :  هل  بدت  عليه  علامات  الانتصار  أم  علامات  الهزيمة ،  فإذا  كثرت  الإصابات  وتنوعت ،  وكانت  أغلبيتها  إصابات  خطيرة  جدا  والتي  لا يمكن  للأطباء  والممرضين  أن   يقضوا  مع  حالة  واحدة    الساعات   الطوال  لعلاجها ،  فإن  الطبيب  الرئيسي  يعلن  حالة  (  التمريض  الحربي )  وهي  أن  طبيبا   يقف  في  باب  المستشفى  الميداني  ويتم ( عزل )  الحالات  الخطيرة  جدا   من  الحالات التي  يمكن  إنقاذها  ،  وعليه   فإنه  يجعل   جهة  من   المستشفى  توضع  فيها   حالات  الذين لا  أمل  في  علاجهم   ويتركونهم  ليموتوا  ببطء  ،  ويجعل  جهة  يجتمع  فيها  كل  ما  لدى  الجيش  من  إمكانيات  لإنقاذ   الحالات  التي  يستقبلونها  ،  وهكذا  يحكمون  على   الحالات  التي  يمكن  معالجتها  لكنها  ستأخذ  منهم  الوقت  والدواء  في  حين  أن  عددا  من   المصابين  في  نفس  اللحظة  يمكن  إنقاذ  حياتهم  بسرعة  مثل  ( بتر اليد   أو  الرجل  أو جروح   طفيفة  أو  حالة  هستيرية  وغير  ذلك  ممن  يمكن  إنقاذهم  في  الحرب  ،  والمستشفى  العسكري  الميداني  حينما   يصل  لهذه  الدرجة  يعلم  جيدا  أن  جيشه  قد  انهزم  وبذلك  اتخذ  أطباؤه  قرار  (  انتقاء  من  يستحق  العناية  من  المصابين  في  هذه  الحرب  )  أي  التكيف  مع  حالة  الحرب  وأين  اتجهت  هل  اتجهت   نحو  الانتصار  أم  نحو  الهزيمة  ووضع  السلاح  ،  لذلك  يختار  الأطباء  في  حالة  ظهور  بوادر  الهزيمة   التعايش  مع  الحالة  كما  هي  ويشرعون  في  انتقاء  المصابين ،  منهم  من  يحكمون  عليه  بالموت  ومنهم  من  يختارونه  للعناية  به ...

ولعل  بوادر  هزيمة  المنظومة  الصحية  المهترئة  أمام  وباء  كورونا  قد  ظهرت  بل  أصبحت  مفضوحة  لذلك  خرج  وزير  الصحة  بعد  أن  سكت  طويلا  عن  ذلك  واختار  الأكاذيب  تلو  الأكاذيب  ،  وأنا  في  موضوعي  السابق  بعنوان   (  كورونا في الجزائر:أكاذيب أرقام السلطة تفضح الكارثة المزرية للبنية الصحية و تقارير تفيد الى إصابة نصف مليون )  المنشور في  ركن للأحرار  فقط  يوم 4 ماي 2020  كنت  قد  صرختُ  أن  الأرقام  التي  تعلنها  الدولة  بأنها  أكاذيب  ،  وبرهنتُ  على  ذلك  بالدليل  ومن  خلال  أرقام  الدولة   نفسها  واستنتجتُ  أن  عدد  المصابين  حسب  أرقامهم  هم   هو  أكثر من  13000   مصاب  في  حين  أنهم  يعلنون  عن  4000  أو  أكثر  بقليل ..  إن  دولة  الأكاذيب  لن  تتخلى  عن  أكاذيبها  ويمكن  أن  تتخلى  شعبها  بسهولة ،  فإذا  اختار  تبون  حاشاكم  أن  يعامل  المصابين  بكورونا   في  الجزائر  معاملة  (  حالة  الحرب  )  فعندئذ  سيختار  من  الشعب  من  يستحق  الحياة  ومن  يستحق  الموت  ،  وعليه  سيرتكب  مجزرة  أخرى  لا  تختلف  عن  مجازر  العشرية  السوداء ،  لقد  قالها  وزره  في  الصحة  قال  علينا  أن   نتعايش  مع  هذا   الوباء  لشهور  أخرى  ،  سيسأل  العاقل  ماذا  جرى ؟  هل  أصبح  عدد  المصابين  أكثر  من  عدد  الأسرة  في  المستشفيات  التي  نعلم  حالتها  ؟  هل  انقضى  الدواء  الذي  سيعالج  به  المصابون ؟  هل  أصبح  عدد  المصابين  يفوق  عدد  الجهاز  الطبي  بكامله  من  أطباء  وممرضين  وممرضات  والتقنيين  الخاصين  بتشغيل  أجهزة   التحاليل  وملحقاتها ؟  هل  وهل  وهل ؟...الأكيد  أن  تبون  حاشاكم  قرر  الحكم  على  الشعب  الجزائري  بالفناء  لأنه  ينتظر  ما  بعد  كورونا ...

ثالثا : العلاج الانتقائي في الجزائر من  كورونا سيكون  فقط  لمافيا الجنرالات وزبانيتهم  وكراكيز الدولة :

منذ  اليوم  الأربعاء  06  ماي  2020  اِعْتَرَفَ  وزير  الصحة  في  حكومة  تبون  حاشاكم   غير  الشرعية 

بأمرين  اثنين  الأول   أن  الجزائر  أصبحت  من  الدول  التي  اجتاحها  وباء  كورونا   بالملايين  وليس  نصف  مليون  كما  قال  موقع  (   كل  شيء  عن  الجزائر )  وقال   بعظمة  لسانه  أننا    سنتعايش  مع  هذا  المرض  يعني  أننا   لا   يجب  أن  نستغرب   من  ارتفاع   عدد  الوفيات   الذي   سيتزايد   بوثيرة  متسارعة  ،  وعلينا   أن  نَـتَـقَـبَّـلَ   الأمر  بشكل   عادي  وهذا   هو   معنى  (  التعايش  مع   الوباء )  أي  لا  تستغربوا  أي   مفاجآت  في  ارتفاع  عدد  الوفيات  لأنه  سيكون  أمرا  عاديا  في  الحالة  التي  وصلناها  ... ثانيا  سيكون   علاج  المصابين  يعتمد  على  (الانتقائية)  أي  سيكون  العلاج  خاصا  بِعِلْيَةِ  القوم  من  مافيا  الجنرالات  وزبانيتهم  والشياتة  الكبار  ومن  له  الولاء  التام  للعسكر ، أما  بقية  الشعب   فإلى  الجحيم  ، لأننا  في  حالة   حرب  مع  الوباء  وقد  انهزمنا  وما  علينا  إلا أن  نختار  من  يستحق  الحياة  أما   الباقي  من  الشعب   فلا   يهمنا   مصيره ...

عود  على  بدء :

أين  ذهبت  ملايير  الملايير  من  الدولارات  منذ  1962  ؟  ولا زلتم  تنفقون  منها  ولو  قليلة  على  غير  الجزائريين  فقبل  شهور  قليلة  أعطيتم  لجنوب  إفريقيا  2   مليار  دولار  ليدافعوا  عن  قضيتكم   الوطنية  قضية الصحراء   في  مجلس  الأمن  باعتبار  جنوب  إفريقيا  عضو  غير  دائم  فيه  ،  لكن  ممثل  جنوب  إفريقيا   في  مجلس  الأمن  ظل   وحده   ينبح   ليبرر   لكم  أنه   قد  استحق  2  مليار  دولار  دون  نتيجة  تذكر  وضيعتم   أموال  الشعب   ظلما  وعدوانا  ،  أما  مشكلة   الصحراء  فالعالم  كله   يعلم  أن  مسألة  الاعتراف  بكونها   مغربية  مسألة  وقت  فقط  وأنتم  تصبون  الماء  في  الرمل  وتختارون  للشعب  الموت  البطيء  سواءا  من حيث  انعدام   التنمية  الاجتماعية  أو من  حيث  اختيار  الأرواح  الجزائرية  التي   ستعرضونها  للموت   عمدا   جراء  وباء  كورونا  ، وستختارون  الذين   سيخضع  للعلاج  لأن  الوباء   قد  هزمكم  شر  هزيمة  لأنكم   لصوص  من  أبناء  اللصوص ،  أنتم  منهزمون  بكورونا  وبغير  كورونا  ...

وأهمس  في  أذن  تبون  حاشاكم  بأن  المغرب  كان  أحد  مختبراته   الدوائية  ينتج  دواء  الكلوروكين  منذ  حوالي  30  سنة  واليوم  قد   أعطى  الأمر  لكل  المختبرات  الدوائية  أن   تنتج  الكلوروكين  حتى  لا  يلتجئ   لغيره   مثلكم  يا  عصابة  الشر  ،  تعرف  لماذا  ؟  لأنه  دولة  ذات  سيادة  وقراره  بيده  ،  وقصة  الكمامات  يعرفها  القاصي  والداني ،  المغرب  دولة  ذات  سيادة  ولا  تحركها  فرنسا  التي  غرقت  كما  غرقت  الجزائر ،  وبدون  خجل  يقول  وزير  الصحة   بلا   حياء  أن  الجزائر  كانت  أول  دولة   استعملت   الكلوروكين  لمعالجة   مرضاه   والذي  أعطى  نتائج   مدهشة  في  العلاج  ، فأين  هو  دواء  الكلوروكين   يا وزير   الصحة  ؟  لقد   بقي   منه  ما  تعالجون  به   زبانيتكم   فقط  ...  وأزيدك   يا تبون  معلومة  خطيرة  جدا  عن  المغرب  ستعمق  الوسواس  القهري  الذي  تعانيه  من  عقدة  المغرب   :  لقد جهز  المغرب  منذ  أكثر من  شهر  1640  سرير  خاص  بالإنعاش  وهل  تعلم  كم  يستغله  لحد  اليوم  89  مصاب  فقط !!!!!    مما  يعني  أن  الذين   يصلون  لمرحلة  الإنعاش  يشكلون  نسبة  قليلة  جدا جدا  من   عدد  المؤكد  إصابتهم  ....

أين  أموالنا  يا  عصابة  الشياطين  ؟ 

آخر  خبر  نزل  في الساعة  16  و 35  دقيقة  : الجزائر_ TSAعربي: يشارف عدد الإصابات المؤكدة بفيروس كورونا في الجزائر على بلوغ عتبة النصف مليون مصاب، وذلك بوصول إجمالي الإصابات إلى4997حالة، بعد إعلان وزارة الصحة اليوم الأربعاء 6 ماي عن تسجيل 159 إصابات جديدة بفيروس كوفيد_19....   

يكفيني  من  الغصة  ما  أرى  في  وطني  وما  يروج  في  العالم  فأرى  أن  شعبي مظلوم  من عدة  جهات :  اغتصب  اللصوص  ثورته  في  1962 -  سرق  نفس  اللصوص ومن  جاء بعدهم  تريليونات   الدولارات  وتركوها  خرابا   يبابا -  ليست  فيها  بنيات  تحتية  بالقياس  لمداخيل  دولة  غازية  نفطية – عشنا  58  سنة  من  الاحتقار  على  يد  عسكر  فرنسا  وأبنائهم -  و حينما  جاءنا  وباء  كورونا  كل  الدول  توكلت  على  الله  وكافحت  ولا تزال  تكافح   بما  أعطاها  الله  لأن  الأمر  كله  بيد  الله  لكن  كما  قال  رسول الله  صلى الله  عليه  وسلم  (  اعقلها  وتوكل  )  إلا  في  بلاد  الجزائر  التي  صرح  وزيرها  مباشرة  وبأمر  من  مافيا  الجنرالات  قائلا :  أيها  الشعب  علينا  أن  نتعايش  مع  هذا  الوباء  أما  العلاج  فسيكون  للعسكر   والمقربين  من  العسكر  لأن  دولة  الجزائر  دولة  عسكرية  وإذا  اختفى  العسكر  اختفت  دولة  الجزائر  من  الخريطة  ...  أيها  الشعب  الجزائري  لكم  الله   أما  الدولة  فقد   رفعت  يدها  لأنها  انهزمت  هزيمة  نكراء  أمام  هذا  الوباء ....

المهم :  لماذا  أخفيتم  عنا  رقم  نصف  مليون  مصاب ؟  وشهادة  مني  لله  وفي  سبيل  الله  : إن موقع  الجزائر  تايمز  الموقر  كان  ولا  يزال  كلما  ذكر  عدد  المصابين  يوميا  يتبعه  بجملة   (وما  خفي أعظم) لقد صدق  حدس  الصادقين  المحبين  للوطن  وانكشفت  أكاذيب  المجرمين   الخونة ....

 

سمير كرم خاص للجزائر تايمز