فَــطِـــنَ الشعب  الجزائري  لأكاذيب  السلطة  في  الجزائر  في  تعاملها مع  أرقام المصابين  بداء  كوفيد 19 ،  وذلك  باتباع  سلسلة  من  المغالطات  الإحصائية   والدخول  في  ألاعيب  علم  الإحصاء،  ويقول علماء  الإحصاء  :  إنه  علم  تجميل  الأكاذيب  الفمضوحة  موجهة  للإنسان  العادي ...

نشر الكاتب والصحفي الأمريكي دارريل هافف، في عام 1954، كتاباً أسماه “كيف تكذب بالإحصائيات”، وقدم من خلاله مقدمة سلسة وخفيفة الظل في علم الإحصاء للقارئ العادي ، ويعتبر أكثر كتاب في علم الإحصاء قراءةً ومبيعاً حول العالم......لم يقصد هافف من وراء كتابه هذا تقديم وصفات سهلة في فن الخداع والتضليل، بل قصد العكس تماماً، أراد للقارئ البسيط العادي صاحب الذكاء المتواضع والكاره غالبا للأرقام وعلومها أن يفهم جيداً كيف تكذب الأرقام في جريدته اليومية، ونشرة الأخبار المسائية، والمجلات الدورية العلمية منها والترفيهية.

 أولا : أكاذيب  خِدَاعٍ  مفضوحة  في إحصاءات  الدولة  الجزائرية  للمصابين  بداء  كورونا  : 

في  البداية  وقبل  كل  شيء  لا بد  من  الدعاء  لأمتنا  الإسلامية  والمغاربية  على  الخصوص  بأن  يجنبها  الله  عز وجل  هذه  الجائحة   الكونية  وأن  تمر  خفيفة  علينا  بفضله  عز وجل  ، ونقول  كما  يقول  حكماء  المسلمين  عندما  يناجون   ربهم   :  "  اللهم  لا  نسألك  ردَّ  القضاء  ولكننا  نسألك  اللطف  فيه  يارب  العالمين ... آمين ".

أولا  وقبل  كل  شيء  سنتعامل   مع  الأرقام   التي  تقدمها   الدولة   الجزائرية  دون  أن  نطعن  فيها  أو  نشكك  في  مصداقيتها  كأرقام ،   لكننا  نحتفظ   بحقنا   في  الملاحظة  عليها  عندما   يقتضي  الأمر  التعامل  مع  هذه  الأرقام   فيما  بينها   وذلك  لنستنتج   أشياء  قد  تنطق   بها  خلفيات  هذه  الأرقام   أثناء  الملاحظة  والمقارنة  والاستنباط  ...

نحن  في  الجزائر  سنأخذ  مثالا  ليوم  واحد  بعينه  وهو  يوم  30  أبريل  2020  ،  وهو  يعتمد  على  الخانات  التالية   في  رصد  إحصاء  حالات  كورونا  وتطورها :

فــــي  الجـــزائر  :

1)    الحالات المؤكدة : 4006

2)    يرقدون  في   المستشفيات  للعلاج : 6805

3)    عدد  الذين  شفاهم  الله  : 1779

4)    عدد  المتوفين  بهذا  الوباء  يرحمهم  الله  :  450

فحينما  نقرأ  مانشيط  في  مجلة  أو جريدة  إلكترونية  أو  ورقية  هذا  العنوان  العريض "  فيروس كورونا : عدد الإصابات في الجزائر يرتفع إلى 4006  حالة "   وعندما   نخوض  في  قراءة  نص  الموضوع   سنجد  فيه  الأرقام  الأخرى  السابقة   الذكر (  6805 - 1779- 450 )   هنا  من  حقنا  أن  نسأل  أين  هو  الرقم  الذي  يمثل  العدد   الإجمالي  للذين   أصيبوا   بهذا  الوباء  منذ  اجتاح   الجزائر  ؟  أي  ما  هو   العدد   التراكمي  الذي  يجمع  لنا   يوميا  كل  الذين  أصابهم   هذا   الوباء  من  دون  الأمراض الأخرى ؟   لنفرض أننا  تجرأنا  على  أرقام  الدولة  وجمعنا  بعضها  إلى  بعض   فستمثل  لنا  العدد  المتراكم  منذ  دخلت  إلى  الجزائر  جائحة  كوفيد  19  إلى  يوم  30  أبريل  2020  ، وقد  أخذنا   هذا  اليوم   كنموذج  لعمليات  تتبع  إحصاء  الذين  أصابتهم  الجائحة ،  فسنخرج  بنتيجة   كارثية   إذ  سيكون  الرقم   هو : 4006+6805+450+1779 =   13040  وهذا  رقم  مُهْـوِلٌ  جدا  ومع  ذلك  لا  نجد  له  أثرا  في  إحصائيات  الدولة  التي  تقدمها  كل  يوم  ،  أو أنه  رقم   يدل  على  أن  العملية  الحسابية  غير  صحيحة   باعتبار أن  رقمي  الوفاة  والمتعافين  لا يمكن  أن  نحسبهم   ضمن  الحالات  المؤكدة  حديثا  مع  تلك  التي  تعالج  في  المستشفيات  ،  إذن  ماذا  بقي  لنا  ؟  بقي  لنا  عدد  الحالات  المؤكدة  المعلنة  في  30 أبريل  2020   بالإضافة  لعدد  الحالات  التي  تتلقى  العلاج  في  30  أبريل  2020   وهما  4006 +  6805  = 10811  وهو  أيضا رقم  مُهْـوِلٌ  وخطير ،  ومع  ذلك  لا  نجد  له   أثرا   هو  كذلك   في  أي  تصريح  لحالة  البلاد  الوبائية  أصدرته  السلطة  الحاكمة  في  البلاد   ليوم  30 أبريل   2020 ،  لكن  مع   ملاحظة  لابد منها  وهي :  أليس  الذين  تعافوا  من  هذا  المرض  وعددهم  1779  وكذلك  عدد  المتوفين  يرحمهم  الله  وهو  450  ،  ألم  يكونوا  من  المصابين  بداء  كوفيد  19  ؟  ولماذ  لا يمكن  إحصاؤهم  ضمن  الذين  أصيبوا  بجائحة  عمت  العالم   اسمها  ( كورونا )  سنة  2020  ،   إذن  من  حقنا  أن  نقول  وحسب  ما  تصدره  الدولة  الجزائرية  أن  هذين  الفئتين  أصيبتا  بوباء  كورونا  في  الجزائر  ولابد  من  إحصائهم  ضمن  العدد  الإجمالي  للذين  أصيبوا  بهذا  الداء  منذ  أن  دخل  البلاد  إلى  أن  ننجو  منه   جميعا   قريبا  إن  شاء  الله ،  وذلك  ما  تفعله  كل  الدول  التي  تحترم   نفسها  وشعوبها  لأنها  تحصي  عدد  الذين  أصيبوا  بداء  كورونا  سواءا   تعافوا  منه   أو  توفاهم  الله  أو  هم  في  طور  العلاج  بالإضافة   للحالات   الجديدة  ،  وعليه  لا  يزال  الرقم  13040  حالة  جزائرية   أصيبت  بداء  كورونا  في  30 أبريل  2020  ،  ولا يزال  رقما  دالا  و مخيفا  جدا  ،  هذا  إذا  لم  يكن  هناك - لا   قدر  الله - أرقام  تم  إخفاؤها  على  الشعب ...  

إذن  تعالوا  نُـفَـتِّتْ  هذه  الأرقام  الرسمية  :   فهي  لا شك  تمثل  الناس  الذين  أصيبوا   بهذه  الجائجة  ومَرُّوا  منها  وإلا  فما  الداعي  لإحصائهم  ؟؟  إلا  أنهم   ينقسمون  إلى  أربعة  فئات  هي أولا  الفئة  التي  تأكدنا  من   إصابتها  بهذا  الوباء  في  هذا  اليوم  30  أبريل  2020  وهو  مجموع  تراكم  عدد  من  الأيام  فيكون  الرقم  هو  4006  ،  إلى  هنا  كل شيء  واضح . ثانيا  الفئة  الثانية :  وهو  عدد  المصابين  الذين  لا يزالون  يتلقون العلاج  في  المستشفيات  وهو  6806   في  نفس  اليوم  30 أبريل  2020   وهو  رقم  لايدخل  فيه  طبعا  العدد  الأول  4006  أي  أن  هؤلاء  لم  يمروا  بعد  من  مراحل  التحاليل  المعقدة  لكن  عددهم  رسمي  وتعترف  به  الدولة  ،  فهل  بإمكاننا  أن  ندخل  رقم  4006   ضمن  عدد  الذين  أصابهم  كوفيد  19   في  الجزائر ،  نعم   وبديهيا  و من  حقنا  ذلك ... إذن  لحد  الساعة  تعترف  الدولة  بهذين  الرقمين  الرسميين  وهما 4006  حالة  مؤكدة  في  اليوم  المذكور  أعلاه   و كذلك  رقم  6806  للذين  يرقدون  في  المستشفيات  للعلاج  شفاهم  الله  ،  ثالثا :  إذا  قمنا  بعملية  جمع   بسيطة   ولا  تحتاج  إلى  عبقرية  آنشتاين  فإن  ذلك  سيكون  كالتالي  4006 + 6806=  10811  وهو  رقم  حقيقي  وَمُهْوِلٌ  لأننا  أخدناه  من  أرقام  الدولة  دون  تغيير ،  إذن  فهي  أرقام   بالنسبة  لحكام  الجزائر  حقيقة ... لكن  لماذا  لا تصرح  الدولة  بالعدد  الناتج  عن  جمع  الحالات  المؤكدة  مع  تلك  التي  في  طور  العلاج  ولو  من  باب  التحايل  على  الشعب  تدويخه   ؟  

لكن  مع  ذلك  لابد  من   بعض  الملاحظات :

1) نعلم  أن  عدد  الحالات  المؤكدة  يوميا  ،  طبعا   هو  رقم  يتراكم  يوميا  أي  يزيد  كل  يوم   برقم  قليل  لكنه  يتراكم  إلى  أن  وصل  في  مثال   يوم  30  أبريل  2020  إلى  4006 ،  لكن  ما هي  دلالة   هذا  الرقم  المتزايد  يوميا  ، إنه  يدل  إما  على  اختناق   الطاقة  الاستعابية  للبنية  الصحية  المتهالكة  في  الجزائر ،  بمعنى  أن  هذا  الرقم   يتوزع  فيما بعد  على  المستشفيات  لإجراء  التحاليل   الضرورية  ،  وقد  لا يصل  رقم  4006  أثناء  مراحل   التحاليل  برمته  إلى  مرحلة  العلاج  لينضاف  إلى  عدد  الذين  يتلقون  العلاج  ،  ومن  ذلك   نستنتج  تزايد  عدد  الوفيات  يوميا   نظرا  للبنية  الصحية  المنعدمة   والفاسدة  والمتعفنة   مثل  السلطة  االقائمة   في  الجزائر  بالإضافة  للنظرة   الاستخفافية   للمواطن  الذي  لا  تساوي  روحه  قيمة  روح  بعوضة . هذا  بالإضافة  إلى أن  الدولة  لا  تدقق  في  نوعية  هذه  الوفيات   (  أي  لا  تفرز  الذين  توفوا  في  المستشفيات  من  الذين  توفوا  وهم  ينتظرون  ظهور نتائج  التحاليل  أو  الذين  توفوا  في  منازلهم  ولم  يعرف  عنهم  أحد  شيئا  إلى  أن  تم  تشريح  جثثهم  وتبن  أن  سبب  الوفاة  وهو  داء  كورونا ) ... فالدولة  تصرح  بأن  عدد  الوفيات  - للأسف - اليوم  هو  كذا  وكذا  والسلام ، أما  كيف  مات  هؤلاء  المصابون  بداء  كورونا  في  اليوم  المذكور وأين  ماتوا  ؟ هل  في  المستشفى  أم  في  انتظار  نتائح  التحاليل  أم  ماتوا   في  منازلهم  وتبين  عند  تشريح  جثثهم  أن  سبب   الوفاة  هي  فيروس  كورونا ؟ ... وكما  يقال  : "  الشيطان  في  التفاصيل " ....

2) نحن  لا زلنا  في إحصائيات  نفس  اليوم   الذي  نجد  فيه  رقما  فاضحا   وهو  1779  وهو  رقم  المتعافين  وهو  كذبة  مفضوحة   ،  ومن  الدلائل  على  أنه  كذبة   مفضوحة   فلأن الدولة   لا  تذكر  مصدر  هذا  العدد  بالضبط :  هل  هم   من  العدد  المتراكم  منذ  دخول  كورونا  للجزائر ومن  مصادر  مختلفة  أي  من  هنا  وهناك  ؟   أو من  الذين  تلقوا   العلاج   في  المستشفيات  وتم  شفاؤهم  بواسطة  الأدوية  ؟  وفي  هذه  الحالة  لماذا   يتراكم  رقم  الإصابات  المؤكدة  بهذا  العدد  الذي  لا  يتناسب  مع  عدد  الذين  شفاهم   الله  وغادروا  المستشفيات  وتركوا  المكان  لغيرهم  من   المُنْتَظِرِينَ ، لأن  رقم  اليوم  30  أبريل  2020  وهو   1779  متعافي  هو   رقم   مخادع  لا  نعرف  هل  هو  عدد  الذين  أصيبوا  بالوباء  فتعالجوا   منه  أم  أن   1779  هو  رقم   دمجوا   فيه   الذين  ثبت  أنهم   غير  مصابين  بداء  كورونا   ولم  يعرفوا   وباء  كورونا   بتاتا   وأدرجوهم  مع  المتعافين   ؟  كل  هذه  المراوغات  الإحصائية   لتبرير  التقليل  من  عدد  المصابين   بداء   كورونا   حتى  تُخْفِي   به  السلطة   كارثة   البنية  الصحية   في  الجزائر.. وسيأتيك  بالأخبار  من  لم  تُزَوِّدِ....

3) ثم   إن  المتعافي  بالعلاج  الدوائي  يأخذ  أياما  لا  تقل  عن  14  يوم  ،  فكيف  يمكن أن  يتعافي  بين  عشية   وضحاها   عشرات  المتعافين  بالعلاج  في  المستشفيات  المنعدمة   في  الجزائر  ونحن  نعرف   حالتها  ،  باختصار  فرقم   1779  رقم  غير  طبيعي  وغير  واقعي   طبيا  وعلميا 

4) إن  السلطات  الحاكمة  في  الجزائر  تنسى  أن  للشعب  ذكاءا  وأنه   يعلم  أن  ما   خفي   هو  أعظم  ، وأن  10  آلاف  مصاب  على  الأقل   هي  الكارثة   الحقيقية  التي  لا شك  فيها   دون  أن  تدرك  التناقضات  في  الأرقام  التي  تدلي  بها  بنفسها   رسميا  -  وأحيانا  لا  تذكر  شيئا  ...

5) إن  الأرقام  السابقة الذكر  ليوم  30  أبريل  2020  وهي (  الحالات المؤكدة   هم  4006  والذين  يرقدون  في   المستشفيات  للعلاج هم  6805  وعدد  الذين  شفاهم  الله  هم 1779  و عدد  المتوفين  بهذا  الوباء  يرحمهم  الله  هو  450  ،  فمن المفروض  مثلا  أن  يترك   رقم  عدد  المتعافين  هذا  أثرا   واضحا  في  نقص  عدد  الراقدين  في  المستشفيات  أو  أن  يمتص  قليلا  من  عدد  حالات  اليوم  ولو  بنسبة قليلة  ، لكن  الذي  تعود  طيلة  58  سنة  وهو  يكذب  على  الشعب  لا يعوزه   الكذب  وخاصة  في  هذه  الظروف  التي  يستغلها  حكام  الجزائر  لصالح   تركيز  كل  مناهجهم  في  الحكم  :  القمع  -  التسلط  -  نشر الأكاذيب -  تلفيق  التهم  -  باختصار  تعبيد  الطريق  للجبان  الوافد  الجديد  على  قصر  المرادية  ليستمر في  الحكم  الكراكوزي  ولو  مدة  معتبرة ، ويعلم  الله  كيف  سيكون  مصيره  بعد كورونا .

ثانيا :أرقام  كورونا  في  الجزائر التي لا  رابط  يربط  بينها  وتلك  سياسة المجرمين الذين  يحتقرون الشعب 

تعالوا  نضحك  قليلا  على  الذي  بني  هذه  الأرقام  الخاصة  بوباء  كورونا  ونشرها  على  الشعب  في  احتقار  فاضح  للشعب ، نحن  دائما  نتحدث  عن  يوم  الخميس  30  أبريل  2020 :   

1)    الحالات المؤكدة : 4006

2)    يرقدون  في   المستشفيات  للعلاج : 6805

3)    عدد  الذين  شفاهم  الله  : 1779

4)    عدد  المتوفين  بهذا  الوباء  يرحمهم  الله  :  450

أولا  ما  العلاقة   بين  رقم  4006   و  6805  ،  إن  كان  لدينا  ذرة من عقل  فهو  الرقم  المهول   المذكور سابقا  وهو  10811   الحاصل  جمعه  من  الرقمين  اللذين  اعترفت  بهما  الدولة  الجزائرية  مما   يعني  أنه  وجب  عليهم  أن  يذكروه  في  بداية  كل  إحصاء  وهو  ما  تفعله   الدول  التي  تحترم  نفسها  حيث  تقول  (  إن مجموع  عدد  المصابين  اليوم  30  أبريل  2020   بفيروس  كورونا  10811  مصاب  وتحدد   أن  منهم  6805  يرقدون  في  المستشفيات   للعلاج  ، وأن  عدد  الحالات  المؤكدة   لهذا  اليوم  فقط   فقد  زادت  بـ  150  حالة  ظهرت  في  هذا  اليوم  ليبلغ  عدد  الإصابات  المؤكدة  اليوم  4006  حالة  مؤكدة   لهذا  اليوم  فقط  ،  وبذلك  فالجزائري  سيقوم  بعملية  بسيطة   ليتأكد  من  أن  أرقام  الدولة   صحيحة   وهي  جمع  الحالات  التي  تتلقى  العلاج  وهو  6805  مع  الحالات  المؤكدة  اليوم  وهو 4006   لتكون  النتيجة  10811  )   ليكون  هو  الحالات  المؤكدة  ليوم  الخميس 30 أبريل  2020  أي  ما  تراكم  حتى  هذا  اليوم  من  حالات بزيادة  عدد  هذا  اليوم  هي 150  حالة  فقط  ،  أما  الباقي   الذي  كان  قبل  زيادة   150  حالة  اليوم  فيعلم  الله  منذ  متى  وهم  أحياء  ينتظرون  دورهم   ليتلقوا  العلاج  في  سرير  بأحد المستشفيات  وهم  بالضبط   3856  أي  ( 4006 – 150 = 3856 ) ،  وقد  يلحق  بعضهم   الموتُ  لا  قدر  الله  وهو  ينتظر  دوره  في  مرحلة  من   المرحل  يعلمها  الله :  هل  ينتظر  دوره  في  مرحلة  التحاليل   التي  تعرف  نقصا  كارثيا  في  الجزائر  رغم  الأكاذيب  التي  تنشرها  وسائل  إعلامهم  الفاسدة  والمتآمرة  معهم  على  الشعب ؟  أم  ينتظر  دوره  في  أن  يفرغ  سرير  يجود  به  أحد  المتعافين  حينما  يغادر  المستشفى ؟ 

 لكن  المصيبة  العظمى   هي  لو  ذكرنا  لكم   ما  تقوم   به  الدول  التي  تحترم  شعوبها   فعلا  دون  زيادة  أو  نقصان ،  فهي  تذكر  رقم  كل  الذين  أصابهم  فيروس  كورونا  في  البلاد  سواءا  كانوا  من  الحالات  المؤكدة  الجديدة  أو من  الذين  يرقدون  في  المستشفيات  للعلاج  أو من  الناجين  أو  من  المتوفين  رحمهم  الله  وتكون  العملية  كالتالي  (  وهي  بالمناسبة  نفس  العملية  التي  بدأنا  بها  الموضوع  وخرجنا   في  أن  مجموع  الذين  أصيبوا   بهذا   الوباء  في  بلادنا   وتوفي  بعضهم   ونجا   الآخرون   فكانت   النتيجة  يوم  30  أبريل  2020   هي   13040.... وهي  النتيجة  المؤلمة  التي  ظل  حكام  الجزائر  يناورون  ويتحايلون   ليظهروا  للشعب  أقل  الأرقام   ويكذبون  بأنهم  مسيطرين  على  الوضع ...

ملاحظة :  لم  نطعن أو  نشكك  في  أرقام  الدولة  بل  فقط   تعاملنا  معها  كما   هي  بنفسها  وكانت  ليوم  واحد  وهو  يوم  الخميس  30  أبريل  2020  ،  تعاملنا  مع  هذه  الأرقام  لنستنتج  منها  هي  دون  غيرها   أرقاما   تفضحها  وتفضح   واضعيها  ...

والشيء  بالشيء  يذكر ،  فعندما   نلتفت  إلى  جارتنا  الغربية  المغرب  الشقيق  وننظر  كيف  تعاملت  مع  موضوع  هذه  الأرقام  ببساطة  شديدة   ،  وهي  بالمناسبة   في  متناول   الجميع  ويمكن  أن  يطلع  كل  سكان  العالم   عليها  فقط  أن  يكون  عندك   صبيب  الانترنت   وأنت  في  دولة   تحترم  حق  الانسان  في  الاطلاع   على  المعلومة ... سنذكر  نفس  الشيء  وفي  نفس اليوم أي   30  أبريل  2020  وبنفس  العناصر ، وسندلي  بملاحظتنا  فيما  بعد :

فـــي  المغرب  :

5)    الحالات المؤكدة : 4423

6)    يرقدون  في   المستشفيات  للعلاج : 2369

7)    عدد  الذين  شفاهم  الله  : 984

8)    عدد  المتوفين  بهذا  الوباء  يرحمهم  الله  : 170

أولا  ندعو  بإجلاء  هذا  الوباء  عاجلا   على  كل  الأمة  الإسلامية  والمغاربية  على الخصوص  بدولها  الخمسة  التاريخية  فقط  ، ثانيا  وكما  قلنا  إننا  لم  نطعن ولم  نشكك  في  الأرقام  التي  تعطيها  الدولة  الجزائرية  ،  لذلك  سنتعامل  مع  أرقام  الدولة  المغربية  بنفس  الطريقة  ولا يهمنا  هل  هي   صحيحة  أو غير  صحيحة ...

أول  ملاحظة  هي أن  عملية  جمع  رقم  الراقدين  في  المستشفيات مع رقم  الذين  شفاهم  الله  مع  رقم  المتوفين  يرحمهم الله  يعطينا  عدد الحالات  المؤكدة  بالضبط  والمعلن عنها  مسبقا ( 2369+984+170= 4423)  .. وإذا  جمعتَ  عدد  الذين  تم  شفاؤهم  مع  عدد  المتوفين  ( 984+ 170 = 1154 )  ثم  قم   بطرح  عدد  الذين  يتلقون العلاج  من  عدد  الإصابت  المؤكدة   ستجد  نفس  الرقم  وهو   1154  ( 4423  - 3269 = 1154  )  مما  يعني  أن  واضع  هذه  الأرقام  يحترم  ذكاء  قارئها  وليس كمثل  من  وضع  رقم  4006 مع  رقم  6805  ولا  دلالة  إحصائية   بينهما  على الإطلاق !!!  ثاني  ملاحظة  هو  أننا  نعلم  بهذه  العملية  البسيطة  جدا  أن  كل  الذين  أصابهم  هذا  الوباء منذ  دخوله  للمغرب  لا  يتعدى  4423  في  يوم  30  أبريل  2020 ... وهذا  هو  العلم  الدقيق  أو  البِنَاءُ  العلمي  الدقيق  للإحصاء ... وعليه  تكون  عملية  تتبع  هذه  الأرقام  غير  مضنية  وغير  ملتبسة  وسليمة   ولا  يريد  منها  صاحبها  أن  يعمي  بَصَرَ  وبصيرة   المتتبع  ،  فهو  يعطيه   أرقاما  منسجمة  مع  بعضها  كيفما  قَــلَّــبْتَها  ذات  اليمن  وذات  الشمال  تعطيك  نتائج  منطقية  مضبوطة ... بينما  فطاحل  علماء  التزوير  في  الجزائر  وضعوا  لنا  أرقاما  نحن  لم  نطعن   فيها  ولم  نشكك  فيها   لكن  حاولنا  أن  نجد   أي  دلالة  إحصائية   سليمة  فيما  بين  هذه  الأرقام  ، فَـتَأَكَّدَ  لنا  أن  نية  التلاعب  بالأرقام  كانت  مبيتة  ،  لكننا  بتعاملنا  مع  نفس  الأرقام  استنتجنا  مصائب  وكوارث ...  المصيبة  الأولى  هي  التلاعب  بعدد  المتوفين   والذين  تم  شفاؤهم  وتساءلنا  هل  يعتبرهم  الإحصاء  ممن  مروا  بجائحة  كورونا  أم  لا  وذلك  عندما  قمنا   فقط  بعملية  جمع  الحالات  المتأكدة  في  ذلك  اليوم  وجمعناها  مع  عدد  الذين  يتعالجون في المستشفيات  فوجدنا  طامة  كبرى  ( 4006+ 6805 = 10811 )

أي أن  10811  لا  يدخل  فيها  اعتبار  المتوفين  وكذلك  اعتبار  الذين تم  شفلؤهم  حسب  تصريح  الدولة   وهو  رقم  غريب  1779  حالة  شفاء  لا توجد  ضمن  رقم  10811  المهول   ،  أما  إذا  جمعنا  كل  الذين  أصيبوا  بفيروس  كوفيد 19   في  الجزائر  منذ  دخول  هذه  الجائحة  إلى  الجزائر   فسنجد  الكارثة العظمى  (  4006+ 6805+1779+450 = 13040 )  أي  13040  جزائري  أصيب  إلى  حدود تاريخ  30  أبريل  2020  ، فهل  نحن  قطيع  من  البهائم  يضحكون  علينا  ؟  طبعا  نحن  كذلك  خاصة  وأن  تبون  حاشاكم  قد  وجد  الفرصة  الثمينة  في  انتشار  هذا  الوباء  في  الجزائر  ليصفي  حساباته  -  وهو  الجبان  الرعديد -  الخالي  من  أي  ذرة  من  النبل  والنخوة  والشهامة ،  فحتى  الحرب   لها  أعرافها   الإنسانية  ،  أولها  المواجهة  وليس  الغدر ثانيها  احترام  الخصم  أثناء  وبعد  المعركة  ،  لكن  العصابات  التي  توالت  على  الجزائر  نشرت  تربية  الخداع  و الرياء  والغدر  والخيانة  والأنانية  والنرجسية  وكل   الموبقات ... أليسوا  تربية  المقبور  بومدين  لعنه  الله  واسكنه  سقر .

وإذا  عدنا   للمغرب  و كيف  تعامل  مع  جائحة  كورونا  فكل  دول  العالم  ووسائل  الإعلام  الدولية   كانت  المغرب  كنموذج   للدولة  التي   عرفت   كيف  تتعامل  مع  الوباء  باستراتيجية   الحكماء  ،  ويكفي  المغرب  أن  كل  وسائل  الإعلام   الالكترونية  وغير  الالكترونية  وقنوات  العالم  قد  تحدثت  وبإسهاب  عن  الاستراتيجية  المغربية   الناجعة  لمواجهة  هذا  الوباء ، ولست  هنا   لأدافع  عن  بلد  شقيق  بل  لأعبر  أني أشعر  بالافتخار  حينما   أسمع  اليمين  الفرنسي  المتطرف  قد  اجتمع مع  الوسط  الفرنسي  واليسار  المتطرف  الفرنسي  على  كلمة  واحدة  وهي  ( Bravo  le Maroc  )  وأمام  ملايين   المشاهدين  في  العالم  ،  وحينما  ينجح  بلد  أخ شقيق  مثل  المغرب  نشترك معه  في  الدم  والتاريخ  و الدين  والمذهب  المالكي  وفي  الجغرافيا  واللغة  العربية  أو  الأمازيغية  ،  فنحن  نفتخر  بذواتنا  ونشعر  بالعزة  الحقيقية  والكرامة  الحقيقية   وليس  الذل  تحت  صباط   العسكر  الذين  نَصَّبَهُمْ  على  ظهورنا  المقبور  بومدين   طيلة  58  سنة  ولا يزالون  ...

  وأخيرا  أهمس  في  أذن  تبون   حاشاكم  : إذا  لم  تستطيعوا  إنتاج  8  ملايين  كمامة  في  اليوم  مثل  المغرب  فعلى  الأقل  عليك  أن  تهتز  للباس  الممرضات  الجزائريات  اللائي  لم  يجدن   سوى  أكياس  القمامة  الزرقاء  فلبسنها   لمواجهة  مرضى  كورونا .... لعن  الله  عديم  الغيرة  على  نساء  وطنه ، أما  رجالها  فقد  أقسموا  أن  يقتلعوك  من  جذورك  أنت  و عبيد  المقبور بومدين  وعلى  رأسهم  مافيا  الجنرالات   في  القريب  العاجل  إن شاء  رب  العزة ..آمين

وإلى  خديعة  أخرى من  خداع  كراكيز  مافيا  الجنرالات  الحاكمين  في  الجزائر.....

 

سمير كرم  خاص  للجزائر  تايمز